Vivo X500 Pro & Max का 200MP Zeiss टेलीफ़ोटो और 17EV डायनेमिक रेंज कितना असली है? कैमरा स्पेक, 400mm एक्सटेंडर, कीमत और भारत लॉन्च की पूरी पड़ताल।
![]() |
| Image Source: Vivo |
जब भी कोई कंपनी अपने फ़ोन के साथ "सबसे अच्छा कैमरा" जैसी बात जोड़ती है, मेरा पहला रिएक्शन यही होता है कि ज़रा रुको, पहले देखते हैं। vivo X500 Pro Max के साथ भी यही हुआ। 200MP का Zeiss टेलीफ़ोटो, 17EV की डायनेमिक रेंज, 400mm तक का ज़ूम... सुनने में लगता है कि कोई छोटा-मोटा कैमरा जेब में आ गया है। इसीलिए मैंने कंपनी के दावे, शुरुआती हैंड्स-ऑन और स्पेक शीट अलग-अलग जगह से पढ़कर देखे, कि इसमें कितना सच है और कितना सिर्फ़ मार्केटिंग।
एक बात पहले ही साफ़ कर दूँ। ये ब्लॉग रिव्यू नहीं है, क्योंकि मैंने फ़ोन हाथ में नहीं लिया। ये उन जानकारियों का हिसाब है जो अभी तक सामने आई हैं, और जहाँ कोई बात सिर्फ़ vivo का दावा है, वहाँ मैंने वही लिखा है।
सबसे पहले: "दुनिया का सबसे बेस्ट" किसने कहा?
टाइटल में जो सवाल है, उसका सीधा जवाब ये है कि अभी इसे साबित करने वाला कोई स्वतंत्र टेस्ट मौजूद नहीं है। कैमरा रैंकिंग के लिए सबसे ज़्यादा हवाला जिस DXOMARK का दिया जाता है, उसके पेज पर आज भी X500 Pro Max के आगे लिखा है कि कैमरा टेस्ट जल्द आएगा। यानी कोई स्कोर नहीं है, कोई रैंक नहीं है।
जो तारीफ़ें आई हैं, वे शुरुआती हैंड्स-ऑन से आई हैं। T3 के एक रिव्यूअर ने तो इसे "शायद अब तक का सबसे अच्छा स्मार्टफ़ोन कैमरा सिस्टम" तक कह दिया, पर वो भी एक राय है और एक ही रिव्यूअर की है। इसलिए मेरा नज़रिया ये है कि कागज़ पर ये फ़ोन बहुत ही तगड़ा है, पर "दुनिया में सबसे बेस्ट" का ख़िताब देने के लिए हमें टेस्ट के नतीजों का इंतज़ार करना चाहिए।
• अगर मै अपने पर्सनल अनुभव की बात करूं तो मैने Vivo X300 Pro इस्तेमाल किया है, और वास्तव में, मैं यह कह सकता हु की यह अभी तक का इंडिया का बेस्ट कैमरा फोन है।
200MP का Zeiss टेलीफ़ोटो: असल में क्या है?
इस फ़ोन की सबसे बड़ी बात यही कैमरा है। स्पेक देखें तो 200MP का सेंसर 1/1.4 इंच का है, लेंस 85mm इक्विवेलेंट है और अपर्चर f/2.67। उसमें CIPA 7.0 रेटिंग वाला स्टेबलाइज़ेशन है, जिसे एक रिपोर्ट के मुताबिक़ किसी फ़ोन के टेलीफ़ोटो के लिए अब तक की सबसे ऊँची रेटिंग बताया गया है। नज़दीक से फ़ोकस करने की क्षमता 15cm है, यानी टेलीफ़ोटो से मैक्रो जैसी फ़ोटो भी ली जा सकती है।
200MP होने का एक फ़ायदा ये है कि सेंसर के अंदर ही क्रॉप करके बीच के ज़ूम (मोटे तौर पर 85mm से 200mm के आसपास) बिना ज़्यादा AI के निकाले जा सकते हैं। बड़ी बात ये भी है कि ये सेंसर पिछले X300 Ultra वाला ही है, इसलिए ये बिल्कुल नई तकनीक नहीं, बल्कि आज़माई हुई चीज़ का सुधरा रूप है। मुझे ये बात अच्छी लगती है, क्योंकि पहली बार आई तकनीक में दिक्कतें ज़्यादा निकलती हैं।
400mm का एक्सटेंडर: मज़ेदार, पर झंझट भी है!
अब आता है असली तमाशा। vivo अलग से Zeiss का टेलीफ़ोटो एक्सटेंडर बेचता है। Gen 2 वाला 2.35 गुना बढ़ाकर करीब 200mm तक पहुँचाता है, और Gen 2 Ultra 4.7 गुना बढ़ाकर करीब 400mm तक। यानी वही शीशा, बस फ़ोन के आगे जुड़ा हुआ। vivo इसे "असली ऑप्टिकल रीच" कहता है, एल्गोरिदम वाला ज़ूम नहीं।
T3 के रिव्यूअर के मुताबिक़ ये लेंस "जो कहते हैं, वही करते हैं" और दूर की डिटेल हैरान करने वाली है। लेकिन उन्होंने ये भी लिखा कि इसके लिए अलग केस और माउंटिंग रिंग चाहिए, फ़ोन का वज़न आगे की तरफ़ झुक जाता है इसलिए ग्रिप अलग से लेनी पड़ती है, लेंस को सेटिंग में ऑन करना पड़ता है वरना फ़ोटो उल्टी आती है, और जो पूरा सेटअप है वो काफ़ी महँगा भी है। एक और रिपोर्ट के मुताबिक़ Engadget के हैंड्स-ऑन में बारीक टेक्स्ट और चेहरों की डिटेल एक्सट्रीम ज़ूम पर थोड़ी धुँधली दिखी। तो साफ़ है कि हर फ़ोटो कमाल की नहीं आएगी, और इसे चलाने के लिए धैर्य भी चाहिए।
एक चीज़ और: 400mm वाली जो सैंपल फ़ोटो सामने आई है, वो vivo के प्रोडक्ट मैनेजर ने ख़ुद डाली है। यानी कंपनी ने ख़ुद चुनी हुई फ़ोटो है, उसके आधार पर कोई फ़ैसला मत लीजिए।
17EV डायनेमिक रेंज: क्या है और कितना भरोसा करें?
अब दूसरा बड़ा दावा। EV यानी रोशनी के "स्टॉप्स", और ज़्यादा स्टॉप का मतलब है कि एक ही फ़्रेम में चमकदार आसमान और अँधेरे साये, दोनों की डिटेल बची रहती है। आसान भाषा में, सूरज के सामने खड़े आदमी का चेहरा काला नहीं पड़ेगा और पीछे का आसमान सफ़ेद नहीं होगा।
इसके पीछे मेन कैमरा है: 50MP का Sony LYTIA L910 सेंसर, 1/1.28 इंच का, जिसमें LOFIC तकनीक है। LOFIC में हर पिक्सल ज़्यादा रोशनी को पकड़ पाता है, इसलिए हाइलाइट्स जल्दी उड़ते नहीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ vivo का दावा है कि असल इस्तेमाल में ये 17EV देता है और सैद्धांतिक अधिकतम 18EV है। एक और रिपोर्ट इसी 17 को सैद्धांतिक अधिकतम बताती है, और Xataka के मुताबिक़ 17EV का ज़िक्र वीडियो के Cinematic Pro Log मोड में आया है। यानी अलग-अलग जगह एक ही आँकड़ा अलग-अलग संदर्भ में लिखा गया है। कोई मुझसे पूछे तो मैं 17EV को vivo का दावा ही मानूँगा, जब तक कोई स्वतंत्र टेस्ट लैब इसे नापकर न बताए।
ये भी देखिए कि जो तुलना वाला वीडियो आया है, उसमें सामने वाला फ़ोन कौन सा है, ये बताया ही नहीं गया। सूर्यास्त वाला एक ही सीन था। इससे मन तो बनता है, पर फ़ैसला नहीं।
![]() |
| Source: Vivo official |
बाक़ी कैमरे: कमज़ोर कड़ी कौन सी है?
एक अच्छी बात ये है कि कैमरा एक ही नहीं, पूरा सेटअप देखना चाहिए। अल्ट्रावाइड 50MP का है, पर सेंसर छोटा है, सिर्फ़ 1/2.75 इंच, और अपर्चर f/2.0। एक फ़्रेंच साइट ने अंदाज़ा लगाया है कि रात में इसकी डिटेल पर असर पड़ सकता है, पर ये टेस्ट का नतीजा नहीं, एक अंदाज़ा है। सेल्फ़ी कैमरा भी 50MP का है। वीडियो में 4K पर 240fps तक की बात है।
T3 के रिव्यूअर को कम ज़ूम और रात की फ़ोटो ज़्यादा पसंद आईं, पर उन्हें ये भी लगा कि प्रोसेसिंग थोड़ी ज़्यादा वाइब्रेंट है, जबकि उन्हें iPhone का नेचुरल लुक पसंद है। यानी रंग आपके स्वाद पर निर्भर करेंगे। ये फ़ोन कैमरा तो अच्छा देगा, पर ज़रूरी नहीं कि हर किसी को उसका लुक पसंद आए।
बैटरी, कीमत और भारत में कब?
ये हिस्सा सबसे ज़्यादा उलझा हुआ है। चीन में बैटरी 8,000mAh की है, मलेशिया में 7,800mAh की, और यूरोप में सिर्फ़ 6,750mAh की। भारत में कौन सी मिलेगी, ये अभी पता नहीं। चार्जिंग 90W वायर्ड और 40W वायरलेस है, और फ़ोन IP68 और IP69 रेटेड है। चिप MediaTek की Dimensity 9600 Pro है और डिस्प्ले 6.85 इंच का 2K है।
कीमत की बात करें तो चीन में ये ¥6,999 से शुरू होता है, जो एक रिपोर्ट के हिसाब से करीब ₹1 लाख बैठता है। यूरोप में 256GB वाले मॉडल की कीमत €1,599 है (लॉन्च ऑफ़र में €1,499), जो एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ₹1.69 लाख के करीब है। भारत की कीमत आधिकारिक नहीं है, पर एक रिपोर्ट का अंदाज़ा है कि ये आराम से ₹1 लाख पार कर सकती है। भारत लॉन्च के बारे में Smartprix जैसी साइटें नवंबर के आख़िर तक की बात कर रही हैं, पर vivo ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे अफ़वाह ही समझिए, पक्की तारीख़ नहीं।
ये फ़ोन किसके लिए है?
अगर आप वाइल्डलाइफ़, स्पोर्ट्स या दूर की चीज़ों की फ़ोटो लेना पसंद करते हैं, और एक्सटेंडर के लिए पैसा और धैर्य है, तो ये फ़ोन आपके लिए बना है। कंटेंट क्रिएटर, जिन्हें पोर्ट्रेट और वीडियो में अच्छी डायनेमिक रेंज चाहिए, उनके लिए भी ये मज़बूत विकल्प लगता है।
लेकिन जिन्हें बस इंस्टाग्राम पर फ़ोटो डालनी हैं, उनके लिए इतना पैसा लगाना शायद ज़्यादा है। साथ ही, एक्सटेंडर वाला पूरा सेटअप फ़ोन से भी महँगा पड़ सकता है, और उसे हर वक़्त साथ ले जाना झंझट भी है।
![]() |
| Source: Vivo |
मेरी सलाह
मेरी राय सीधी है। कागज़ पर ये इस साल का सबसे दिलचस्प कैमरा फ़ोन है, इसमें शक नहीं। पर "दुनिया का सबसे बेस्ट" कहने से पहले मैं DXOMARK का स्कोर और कुछ स्वतंत्र रिव्यू का इंतज़ार करूँगा। अगर आपकी जेब ₹1 लाख के ऊपर का फ़ोन झेल सकती है, तो लॉन्च के दिन जल्दबाज़ी मत कीजिए। भारत की बैटरी, कीमत और ऑफ़र देखिए, फिर तय कीजिए। और अगर आपको एक्सटेंडर की ज़रूरत नहीं, तो बिना उसके भी ये फ़ोन बहुत कुछ देता दिख रहा है, इसलिए उसपर अलग से पैसा सोच-समझकर ही ख़र्च कीजिए।
आपको क्या लगता है, क्या vivo सच में कैमरा का राजा बन पाएगा, या अब भी कोई और आगे है? और क्या आप ऐसे फ़ोन के लिए ₹1 लाख से ऊपर देने को तैयार हैं? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताइए।
स्रोत: Notebookcheck, Smartprix, Beebom, Xataka, Phototrend, T3, PhotoWorkout, Android Authority, Nokiamob, DXOMARK
Published By- Ayush Pandey



No comments:
Post a Comment